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बैंडिट क्‍वीन: फूलन देवी का 11 साल की उम्र में 21 दिनो तक हुआ था गैंग रेप !!

Pankaj Panday
Friday, November 8, 2019 | November 08, 2019 WIB Last Updated 2021-02-23T06:11:15Z

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव गोरहा का पूर्वा मे 10 अगस्त 1963 मे जन्म लेने वाली फूलन का 80 के दस्क मे खौफ था नेता हो या फिर मंत्री उनके नाम से उन्हे पसीने आते थे.लेकिन जिस फूलन के नाम को सुनकार लोग घरो मे दुबक जाते थे उस फूलन की शादी महज 11 साल की उम्र मे हो गायी और ओ भी फूलन से चौबीस साल बड़े आदमी से जो फूलन का रोज बलत्कार करता रहा.

1975 के आसपास फूलन को बेहमई गांव के कुछ ठाकुरों ने एक कमरे में बंद कर लिया. और उसके साथ बारी बारी 21 दिनों तक गैंग रेप करते रहे. यही नहीं फूलन को उसे नग्न कर पूरे गाँव उन ठाकुरों नें घूमाया और यही से जन्म हुआ चम्बल की फूलन का. हलाकी  फूलन किसी तरह उन ठाकुरों के चुगाल से भागने मे कामयाब रही,
बेहमाई से भागने के कुछ महीनों बाद, फूलन उन ठाकुरों से बदला लेने  लिए गाँव लौटी । और 14 फरवरी 1981 की शाम को ओ जो हुआ जिसकी शायद उन ठाकुरों ने कल्पना नहीं की थी.  अचानक पूरे गाव गोलियो की तद्त्दहट गूज़ उठी और लोग अपने अपने घरो मे दुबक गए तब पता चला  22 ठकरुओ की फूलन ने हत्या करदी,  बेहमई मे हुये इस नरसंहार ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया किया । उस समय के उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वी। पी। सिंह इस्तीफा तक देना पड़ा,

बेहमई नरसंहार के दो साल बाद इंदिरा गाँधी की सरकार ने (1983) में उनसे समझौता किया की उसे (मृत्यु दंड) नहीं दिया जायेगा और उनके परिवार के सदस्यों को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जायेगा इधर फूलन की तबीयत भी खराब चल रही थी और उसके गिरोह के ज्यदातर  साथी या तो मर चुके थे या फिर पुलिस के हाथों मारे गए थे,  हालांकि,  फूलन को उत्तर प्रदेश पुलिस पर भरोसा नहीं था और उसने जोर देकर कहा कि वह केवल मध्य प्रदेश पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करेगी, और अपने दस हजार समर्थकों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया.

बिना मुकदमा चलाये ग्यारह साल तक जेल में रहने के बाद फूलन को 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने रिहा कर दिया। ऐसा उस समय हुआ जब दलित लोग फूलन के समर्थन में गोलबंद हो रहे थे और फूलन इस समुदाय के प्रतीक के रूप में देखी जाती थी। फूलन ने अपनी रिहाई के बौद्ध धर्म में अपना धर्मातंरण किया। 1996 में फूलन ने उत्तर प्रदेश के भदोही सीट से (लोकसभा) चुनाव जीता और वह संसद तक पहुँची। 25 जुलाई सन 2001 को दिल्ली में उनके आवास पर फूलन की हत्या कर दी गयी। उसके परिवार में सिर्फ़ उसके पति उम्मेद सिंह हैं।
फूलन की हत्‍या को राजनीतिक षडयंत्र भी माना जाता है। उनकी हत्‍या के छींटे उसके पति उम्‍मेद सिंह पर भी आए और फूलन के परिवार वाले उन्हें पीट भी चुके हैं। हालांकि उम्‍मेद के ऊपर आरोप साबित नहीं हुये  





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