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शबनम अली और सलीम के प्यार की कहानी !! जो फाँसी के बाद खत्म होगी

Pankaj Panday
Monday, February 22, 2021 | February 22, 2021 WIB Last Updated 2021-02-23T06:11:08Z

शबनम अली,आजाद भारत के इतिहास की वो पहली महिला अपराधी है, जिसे भारत में फांसी पर लटकाया जाएगा। और इसकी तैयारियां यूपी के मथुरा जेल में चल रही है लेकिन क्यों ? ऐसी कौन सी वजह थी, की, शबनम को फांसी पर लटकाया जाएगा ? यह जानने  और समझने के लिए 15 अप्रैल, 2008. की उस घटना को समझना होगा जब यूपी के अमरोहा के बावनखेड़ी गाँव में सात लोगों की कुल्हाड़ी से काटकर ह्त्या की गयी थी। 



आज से करीब 12 पहले यानि 15 अप्रैल, 2008 को. घड़ी में उस रात डेढ़ बज चुके थे. ज्यादतर गाँव के लोग गहरी नींद में थे. तभी अचानक  एक लड़की के ज़ोर-ज़ोर से चिखनें की आवाज ने पूरे गांव की नींद को तोड़ दिया। लोग मौके पर पहुंचे और वहाँ पर उन्होंने जो देखा ! उसे देख उनकी सांसे थम गयी. ,घर के अंदर 7 लाशें खून से लथपत पडी थी और उन लाशों के पास  25 साल की शबनम जोर जोर से चीख रही थी. शबनम के आसपास जो लाशें पड़ी थी उनमें शबनम के मां-बाप.दो भाई.  एक भाभी. एक मौसी की बेटी.  और शबनम का एक भतीजा शामिल था....


अब सवाल था ! कि सात लोगो की मौत के बाद भी शबनम कैसे ज़िंदा बच गयी, कौन थे वो लोग जिन्होंने 25 साल की शबनम को तो छोड़ दिया लेकिन 10 महीनें के बच्चे को मार दिया  सावल तो कई थे लेकिन जवाब कोई नहीं ? 


मौके पर जब पुलिस पहुंची तो शबनम ने पुलिस को बतया कि उस रात  कुछ लुटरे उनके घर में घुस गए थे.  उसके परिवार के सात लोगों का क़त्ल कर डाला शिवाय उसके. शबनम ने कहा जब घर मे लूटेरे मेरे परिवार के लोगों का कत्ल कर रहे थे उस समय मैं बाथरूम में थी इसलिए बच गई.... पुलिस ने तफ्शीश  शुरू की और फिर जो सच निकलकर आया उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. दरसल इस पूरी घटना को किसी और ने नहीं बल्कि खुद 25 साल की शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अंजाम दिया था..


यानी कि शबनम ने ही अपने पिता शौकत, मां हाशमी, भाई अनीस और राशिद, भाभी अंजुम और फुफेरी बहन राबिया का कुल्हाड़ी से हमला करके कत्ल कर दिया था.  और भतीजे अर्श का गला घोंटकर मौत के घाट उतार दिया... शबनम ऐसा इसलिये किया क्योंकि उसे लगता था की ये सभी लोग उसके प्यार में रोड़ा है....गौर करने वाली बात यह थी जिस वक्त शबनम ने अपनें भतीजे अर्श का गला दबाया तब वह खुद गर्भवती थी  लेकिन फिर भी उसके अपने 8 महीने के भतीजे का गला दबाते समय हांथ नहीं कंपे....


शबनम और उसका प्रेमी सलीम शायद कभी जेल न पहुंचते लेकिन कुछ मामूली सबूतों ने उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया..दरअसल, शबनम ने शादी नहीं की थी. मगर ओ वारदात के वक्त तीन महीनें की गर्भवती थी,  यही वजह थी की पुलिस के शक की सुई शबनम के ही इर्द गिर्द घूम रही थी शबनम की कॉल डिटेल्स भी इसी तरफ इशारा कर रही थीं. क़त्ल की रात उसकी एक ही नंबर पर कई बार बात हुई. जिस नंबर से शबनम की बात हुई वो कोई और नहीं बल्कि उसका प्रेमी सलीम था....


पुलिस को यकीन हो चूका था की खून शबनम ने क्या है लेकिन कोई ठोस साबुत नहीं था  अब पुलिस के पास एक ही चारा बचा था – कड़ी पूछताछ.  और उसके बाद जो सच निकलकर सामने आया उसने प्यार की परिभाषा ही बदल दी आज भी बावनखेड़ी और आस-पास के गांवों में कोई अपनी लड़की का नाम शबनम नहीं रखता. 


अब इस वारदात को 12 सालों का वक्त गुजर चूका है... सोचिए ये प्रेम का कैसा कुरूप चेहरा था जिसनें प्यार पाने के लिए  एक आठ माह के नवजात की भी जान ले ली...


शबनम ने जेल में ही एक बेटे को जन्म दिया था जिसका नाम ताज है...ताज अब 12 साल का हो चुका है..  अब उसे भी माँ की फांसी का डर सतानें लगा है  माँ को बचानें के लिए उसने राष्ट्रपति को चिठ्ठी लिखकर माँ को छोड़ने की अपील की है.. शबनम के डेथ वारंट पर किसी भी वक्त हस्ताक्षर हो सकते है।।। इसी बीच शबनम के बेटे ताज ने देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से अपनी मां की फांसी की सजा माफ करने की गुहार लगाई है...शबनम के इकलौते बेटे ने बताया कि उसकी मां उसे बेहद प्यार करती है. उसे गले लगाती है और पैसे भी देती है. इस मासूम ने देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से अपनी मां के गुनाहों की सजा को माफ करने की अपील की है, ताकि उसके सिर से मां का साया न उठ जाए. 



पिछले 12 साल में शबनम-सलीम के केस में करीब 100 तारीखों तक अदालत में जिरह चल चुकी है.... फैसले के दिन जज ने 29 गवाहों को बयान सुने थे.... 14 जुलाई 2010 में लोअर कोर्ट में सलीम और शबनम को दोषी करार दिया था. अगले दिन 15 जुलाई 2010 को जज एसएए हुसैनी ने सिर्फ 29 सेकेंड में दोनों को फांसी की सजा सुना दी थी....इस मामले में 29 लोगों से 649 सवाल पूछे जा चुके है जिसके बाद कोर्ट ने आना फैसला सुनाया था...



अगर डेथ वारंट जारी होता है तो शबनम के मथुरा जेल में शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए अलग बैरक तैयार की जाएगी। फिलहाल शबनम रामपुर जेल में बंद है। उसे फांसी मथुरा जेल में दी जाएगी। एक साल पहले भी मथुरा जेल में इसी तरह तैयारी हुई थी। तब पवन जल्लाद को बुलाकर फांसीघर का निरीक्षण भी कराया गया था...मथुरा जेल के जेलर एमपी सिंह ने बताया कि हमारे पास अभी तक कोई सूचना नहीं है। अभी हमने फांसीघर की केवल साफ-सफाई कराई है...

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