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दिल्ली पुलिस की नौकरी ठुकरा चुके है राकेश टिकैत...टिकैत परिवार की जानिए पूरी कहानी

Pankaj Panday
Friday, February 5, 2021 | February 05, 2021 WIB Last Updated 2021-02-23T06:11:10Z
चौधरी चरण सिंह के बाद देश के दूसरे बड़े किसान नेता के तौर पर महेंद्र टिकैत ने अपनी क्षवि बनाई थी...90 के दशक और उससे पहले भारत का किसान टिकैत को अपना मसीहा समझने लगा था...महेंद्र टिकैत ने कई ऐसे बड़ आंदोलन किए जब भारत की सरकार उसके सामने झुकना पड़ा....टिकैत की किसान विरासत को अब उनके बेटे राकेश टिकैत संभाल रहे है..ये वहीं राकेश टिकैत हैं जो कभी खुद दिल्ली पुलिस में SI पद पर तैनात थे...और आज दिल्ली पुलिस ही उनकी घेराबंदी कर रही है...

                                                                                                            



बात 1987 की है जब बिजली के दाम को लेकर किसानों ने शामली जनपद के करमुखेड़ी में राकेश टिकैत के पिता महेंद्र सिंह टिकैत की अगुआई में एक बड़ा आंदोलन हो रहा था..इस आंदोलन में जयपाल और अकबर नाम के दो किसानों की पुलिस की गोली लगने से मौत हो गई थी..इसके बाद भारतीय किसान यूनियन की स्थापना 1987 की गई थी...और इस यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत के पिता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को बनाया गया... इसके बाद महेंद्र टिकैत किसानों के हक की लड़ाई जीवन भर करते रहे और अपनी छवि किसान मसीहा के तौर पर बना ली...... 

राकेश टिकैत के पिता महेंद्र सिंह टिकैत की शादी बलजोरी देवी से हुई थी. उनके चार बेटे और दो बेटियां हैं. महेंद्र सिंह टिकैत के सबसे बड़े बेटे का नाम नरेश टिकैत हैं, जो फिलहाल भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर तैनात है...वहीं दूसरे नंबर पर राकेश टिकैत...राकेश टिकैत किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं...और इनके दो छोटे भाई है... सुरेंद्र टिकैत नरेंद्र टिकैत... 

राकेश सिंह टिकैत का जन्म मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली गांव में 4 जून 1969 को हुआ था....इन्होने मेरठ यूनिवर्सिटी से एमए की पढ़ाई की है. उसके बाद एलएलबी भी किया. राकेश टिकैत की शादी 1985 में बागपत जनपद के दादरी गांव की रहने वाली सुनीता देवी से हुई थी...शादी वाले साल की राकेश की नौकरी दिल्ली पुलिस में लग जिसके बाद दिल्ली में ही रहकर पत्नी के साथ नौकरी करने लगे... 

राकेश टिकैत दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर 1985 में भर्ती हुए थे, लेकिन बाद में प्रमोशन होकर सब इंस्पेक्टर बन गए थे...इसी दौरान 90 के दशक में दिल्ली के लाल किले पर इनके पिता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में किसानों का आंदोलन शुरू हो गया.

सरकार की ओर से राकेश टिकैत पर पिता महेंद्र सिंह टिकैत से आंदोलन खत्म कराने का दबाव बनाया जाने लगा...ऐसे में राकेश टिकैत ने उसी समय पुलिस की नौकरी छोड़कर किसानों के साथ खड़े हो गए थे. इसके बाद से राकेश टिकैत किसान राजनीति का हिस्सा बन गए और देखते ही देखते ही महेंद्र सिंह के किसान सियासत के वारिस के तौर पर इन्हें देखा जाने लगा. 

15 मई 2011 को लंबी बीमारी के चलते महेंद्र सिंह टिकैत के निधन के बाद बड़े बेटे चौधरी नरेश टिकैत को पगड़ी पहनाकर भारतीय किसान यूनियन का अध्यक्ष बनाकर कमान सौंप दी गई और राकेश टिकैत राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया...राकेश टिकैत को अध्यक्ष बनाने की एक वजह और थी...पिता महेंद्र सिंह टिकैत बालियान खाप से आते थे. इसी की वजह से उनकी मौत के बाद उनके बड़े बेटे नरेश टिकैत को भारतीय किसान यूनियन का अध्यक्ष बनाया गया,  क्योंकि खाप के नियमों के मुताबिक बड़ा बेटा ही मुखिया हो सकता है....

राकेश टिकैत के बड़े भाई नरेश टिकैत भले ही किसान यूनियन के अध्यक्ष हो, लेकिन आम तौर पर भारतीय किसान यूनियन की कमान राकेश टिकैत के हाथ में ही है और सभी अहम फैसले राकेश टिकैत ही लेते हैं. किसान आंदोलन की रूप रेखा आज भी राकेश टिकैत ही तय करते हैं. राकेश टिकैत ने दो बार राजनीति में भी किस्मत आजमा चुके हैं. पहली बार 2007 में इन्होंने मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था, लेकिन नहीं जीते ...इसके बाद राकेश टिकैत ने 2014 में अमरोहा जनपद से राष्ट्रीय लोक दल पार्टी से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन फिर नहीं जीते...

कुछ आंकड़े और किसान नेताओं के मुताबिक, किसानों की लड़ाई को लेकर राकेश टिकैत अब तक 44 बार जेल जा चुके हैं. मध्यप्रदेश में एक समय  भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ उनको 39 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था. इसके बाद दिल्ली में संसद भवन के बाहर किसानों के गन्ना मूल्य बढ़ाने को लेकर उन्होंने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था... गन्ना जलाने की वजह से उन्हें तिहाड़ जेल में भी भेज दिया गया था. राजस्थान में भी किसानों के हित में बाजरे के मूल्य बढ़ाने के लिए सरकार से मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं जिसके बाद टिकैत को जयपुर जेल में बंद किया गया था...अब एक बार फिर से दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर राकेश टिकैत चर्चा में आए हैं....
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